Saturday, April 12, 2008

३ क्षणिकायें...

जीवन कठिन डगर है
जो साँसें नहीं हैं गहरी
कैसे प्रभु मिलेगें
मन जो रहेगा लहरी
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मैनें धर्म को अधर्म के साथ
चुपचाप खड़े देखा है
मैं अधर्म की अट्टाहस से नहीं
धर्म की खामोशी से हैरान हूँ
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जहाँ छोड़ रख्खा हो अंधेरा
सबने भरोसे सूर्य के
वहाँ जलता हुआ एक दीप भी
किसी सूरज से कम नहीं

Sunday, April 6, 2008

लोग...

तेरी इस दुनियाँ में प्रभु जी
रंग-बिरंगे मौसम इतने
क्यों फ़िर सूखे-फ़ीके लोग
थोड़ा खुद हँसने की खातिर
कितना रोज रुलाते लोग
बोतल पर बोतल खुलती यहाँ
रहते फ़िर भी प्यासे लोग
पर ऎसे ही घोर तिमिर में
मेधा जैसे भी हैं लोग
सत्य, न्याय और धर्म की खातिर
लड़ते राह दिखाते लोग
एक राम थे जिनने हमको
लक्ष्मण-भरत से भाई दिये
और यहाँ सत्ता की खातिर
लड़ते देश लुटाते लोग

Saturday, April 5, 2008

रौशनी और अंधकार...

मैनें देखा है रौशनी को
हाथों में अंधकार लिये
अंधकार से लड़ते हुये
निरंतर चल रहे
इस संघर्ष में
रौशनी को थकते हुए
अंत में नहीं रही रौशनी
हमारे बीच
अंधकार आज भी
वैसा ही खड़ा है
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मैनें देखा है रौशनी को
हाथों में रौशनी लिये
अंधकार से लड़ते हुये
निरंतर चल रहे
इस संघर्ष में
अंधकार को थकते हुए
अंत में रौशनी बढ़ी है
हमारे बीच
अंधकार आज भी
वैसा ही खड़ा है

Saturday, February 23, 2008

प्राण...

आँसू यह अब झरता नहीं
किसी को चुप करता नहीं
बस गाँठों पर गाँठें
यहाँ कसता है आदमी
एक पल में प्राण गये
तो मुर्दा है आदमी

कहता है तो रूकता नहीं
खुद की भी यह सुनता नहीं
ना खुलकर है हँसता
ना रोता है आदमी
एक पल में प्राण गये
तो मुर्दा है आदमी

देह तर्पण में लगा
और प्राण की सुनता नहीं
बस छोड़कर यहाँ खुदको
सब जानता है आदमी
एक पल में प्राण गये
तो मुर्दा है आदमी

कर्मफ़ल और मृत्यु
सबसे बड़े दो सत्य हैं
क्यूँ आज फ़िर इंसानियत को
भूला है आदमी
एक पल में प्राण गये
तो मुर्दा है आदमी

Sunday, February 10, 2008

दूर तक है बहना...

अभिव्यक्ति से बढ़कर रखी थी
अव्यक्त से आशा
इंसानियत को मानकर
सही धर्म की परिभाषा
उसने पहले
जितना सहा जा सकता था
उतना सहा
फ़िर
जितना कहा जा सकता था
उतना कहा
पर धीरे-धीरे उसने जाना
गर अकेले चल पड़ा
तो भी मंजिलें मिल जायेंगी
पर अकेले व्यक्त इनको
क्या मैं भला कर पाऊँगा
यह सही यहाँ मैं नहीं
पर प्रतिबिम्ब हैं मेरे सभी
फ़िर क्यों उन्हें है सहना
बस मुझे तो संग इनके
दूर तक है बहना
बस मुझे तो संग इनके
दूर तक है बहना